कैसे इस्तेमाल करें
सालाना आय और (पुरानी व्यवस्था के लिए) अपनी कटौतियाँ डालें। दोनों व्यवस्थाओं का टैक्स, सेस समेत, साथ-साथ दिखेगा और बताया जाएगा कि कौन-सी व्यवस्था आपके लिए सस्ती है।
उदाहरण से समझें
₹15 लाख कर-योग्य आय, नई व्यवस्था:
₹4–8 लाख पर 5% = ₹20,000; ₹8–12 लाख पर 10% = ₹40,000; ₹12–15 लाख पर 15% = ₹45,000; कुल ₹1,05,000 + 4% सेस
कुल टैक्स = ₹1,09,200 (प्रभावी दर सिर्फ़ 7.3%)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सच में ₹12 लाख तक टैक्स नहीं लगता?
हाँ — नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की कर-योग्य आय पर 87A छूट से टैक्स शून्य है। सैलरीड के लिए ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़कर ₹12.75 लाख की सैलरी तक टैक्स नहीं बनता।
₹12 लाख से 1 रुपया ज़्यादा हुआ तो?
छूट खत्म हो जाती है, पर "मार्जिनल रिलीफ़" लागू होता है — टैक्स उतना ही लगेगा जितनी आय ₹12 लाख से ऊपर है, जब तक सामान्य गणना उससे कम न हो जाए।
नई और पुरानी व्यवस्था में से कौन चुनें?
दोनों की गणना करके ही चुनें। मोटा नियम: कुल कटौतियाँ ₹3.5–4 लाख से ज़्यादा हों तो पुरानी व्यवस्था जीत सकती है, वरना नई। हर साल दोबारा जाँचें।
सेस क्या है?
गणना किए गए टैक्स पर 4% स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेस सबको देना होता है — यह कैलकुलेटर उसे जोड़कर ही कुल टैक्स दिखाता है।
विस्तृत फ़ॉर्मूला, स्रोत और अंग्रेज़ी FAQ के लिए देखें: Income Tax Calculator